मार पडा तब रोना क्या ?

(तर्ज: प्यार किया तब डरना क्या... ? )
मार   पड़ा   तब  रोना   क्या ? 
मारा नहिं था,गालि टिया था -
तब भी उसको सहना क्या ?।।मार पडा0 ।।टेक।।
अरे आदमी ! तू नहिं समझा।
गाली तो   है   मारही   दूजा ।।
शब्द-बाण छेटता   कलीजा ।
हार पड़ा तब कहना क्या ? ।।मार पडा 0 ।।1।।
क्यों किसको अपमानित करना ?
वह है मरनेसे भी मरना ।।
प्राण जाय,कहूँ शब्द न सहना ।
यह सन्देश को बहना क्या ?।।मार पडा 0।।2।।
सबसे आदर से ही चलना ।
अपना -परका कोई हो नाना ।।
तुकड्यादास कहे, सुन भाई -
सच्चा हो तब डरना क्या ? ।। मार पडा 0 ।।3।।