मनमानी करने को अष्ट ग्रह

(तर्ज : बैगानी शादी में अब्दुल्ला दिवाना...)
मनमानी करने को, अष्ट-ग्रह आये है ।
करने को शान्ति, हम सेवा भरा लाये है ।।टेक।।
कारण को ढूँढे हम, पापों को मूँडे हम ।
व्यसनों को सारे छोडे तृष्णा ये गूंडे हम,
                तृष्णा ये  गूंडे   हम ! ।।1।।
घुंसखोरि छोडे हम, लुचपत को तोड़े हम ।
भाईचारा रखे सबमें, प्रेम -नाता जोड़े हम, 
               प्रेम नाता जोड़े हम ! ।।2।।
पापोंसे धरती जले, पुण्योंसे सुख मिले ।
धर्मोंसे देश खुले, देवोंकी राह खुले,
               देवोंकी  राह   खुले ! ।।3।।
तपियोंका तप बोलें, ग्रहोंका नाश टले ।
तभी सबको शांति मिलें, सन्तोंकि भक्ति चले,
               सन्तोंकि भक्ति चलें ! ।।4।।
दवा ये सबकों भेजो, दृहाई कि राह खोजो |
साथि मिलें प्यारे जो जो, मित्र बनाकेहि भेजो
              मित्र बनाके ही भेजों ! ।।5।।
गरिबोंकि कद्र कीजों, किसिसे न क्रोध कीजों।
तुकडयाकि बात सुनो, साथ करो कहता हूँ जो,
             साथ करो कहता हूँ जो ।।6।।