भज-भज गुरु के नाम सदा
(तर्ज: छमू-छम् बाजे पायलिया.... )
भज-भज गुरु के नाम सदा ! !
तेरा सिध्द बनेगा काम सदा, भाई ! ।।टेक।।
उसको लगता न पैसा -अधेला कोई ।
उसको लगता न तीरथ -मन्दर कहीं ।।
प्रेम -तारी ,चढा,दिल को आगे बढा ।
करले अपनी नजर को, श्याम सदा ।। भाई ! ।।1।।
पंथ उसको नहीं , अन्त उसको नहीं ।
जात उसको नहीं, उम्र भी तो नहीं ! !
उसमें होती लगन,सारा दम हो मगन ।
प्यारा, डोले गगनभर, राम सदा ।। भाई ! ।।2।।
गले मोहब्बत की माला चढाओ भले ।
तनमें सेवा की कफनी रंगाओ भले ! !
त्याग का भस्म है,काम की कश्म हैं ।
कहता तुकड्या,मिलेगा आराम सदा भाई !।।3।।