बन्दे ! अबतो कहना मान ?
(तर्ज: उध्दवा! अजब तुझे सरकार... )
बन्दे ! अब तो कहना मान ?
समय मिलेगा, नहिं फिर तुझको,उध्दारन को जान ! ।।टेक।।
बेढंगापन था जब तन में ।
ज्वानी की मस्ती थी मन में ।।
मगर अभी तो उमर है बीती, कब होगा इन्सान ! ।।1।।
चोरी- लबाडी - गुंडापन में ।
बीती उमर सारी जीवन में ।।
अब तो दरवाजे जम आये, धूल मिलाने शान ! ॥2॥
कभू न बोला मीठी बानी ।
कईकों की तोडी जिन्दगानी ! !
लुचपत खाना जनम न छोडा,मौतने लिया बयान ! ।।3।।
अब तो आँखे खोल दे अपनी ।
देख किने डाली थी मोहनी ! !
तुकड्यादास कहे नहिं मानी, नाहक खोवे प्राण ! ॥4।।