भारतकी हमारे नैया

          (तर्ज : विश्वास पे क्यों बैठा है? ....) .
भारत की हमारे नैया, मँझधार पडी है भैया!
आजा रे ! आजा कन्हैया ! तूही हैं  पार  करैया! ।।टेक।।
दूध -दही की नदियाँ बहती, तेरे जमाने माँहि।
घर-घर थी सादगी जिंदगी,पाप-ताप कछु नाही।।
अब तो कटती हैं गैया, घुमते है शराबी  भैया ।
गुण्डों की चलती आँधी,मिलता नहिं कोई खिवैया।।1।।
चोरी -जारी, रिश्वतखोरी, घर-घर नाच रही है।
सज्जनता को कोइ न पूछे,जीना मुस्किलही है।।
हाँजी से हाँजी लगाओ, तब तो नेता बन जाओ । 
कुछ धरम-करम मत बोलो,बोलो तो सिनेमा-सैयाँ ।।2।।
सिफारिशों से भरती होते, होते पास उन्हींसे।
काम नहीं करना चाहते हैं, रहते राज-भरोसे।।
तू एक दफे तो आजा,तुकड्या कहे देख तमाशा।
ले चक्र  सुदर्शन  कर  में, जो   तेरा    रहा    रवैया ।।3।।