मैं तेराही ही जाऊँ रे कन्हैया !

            (तर्ज: गाऊ निशिदिनी तव... )
मैं तेराही हो जाऊँ रे कन्हैया ! मनमे  आया । 
तेरी कीरतपे मोह गयी काया, जबसे गाया ।।टेक।।
द्वार बंद तेरे, चारों  ओर   देखा ।
राह देखता हैं, नैन लगा झाँका ।।
खोलना किवाडे, दिल लभाया, छोड़ी माया ।।१।।
वक्त है सुनहरा, फूलसी   सुगंधी ।
रंग चला बाँका , प्रेम - किरण - धुदी ।।
अब ना बचा मुझको,ले समाया,पास  आया ।।२।।
दिल है ध्यान करने,नैन निरखनेको ।
प्रिय जबाँ गावे यह, प्रेम परखने को ।।
तुकड्याकी ले पुकार,चरण पाया,भेद खोया ।।३।।