मेरी कसम, मेरे दिलकी कसम !

       (तर्ज : हम है भले बुरे... )
मेरी कसम, मेरे दिलकी कसम !
अब तो भाती नहीं है जरा   जिंदगी ।।टेक।।
जहाँ देखता हूँ वहीं झूठ झांके।
विश्वास करने को डरती है आँखे।
धोखा   ही  दिखता   नजर    में ।।
जाऊँ किसके गले? कौन होंगे भले ?
कौन लेगा   मेरी   आखरी    बंदगी ? ।।1।।
में चाहता हूँ, सही   राह    पाऊँ ।
प्यारे प्रभूके ही चरणों में जाऊँ ।।
लगता    ठिकाना     कहिं       नहीं ।।
कितना पकड़ में गम ? अब तो छूटेगा दम,
करके     अंखियाँ     उधर    है    लगी ।।2।।
कितने दफे मैने छोडा है   तनको।
पशु-पक्षि-कीटक में पाये जनम को ।
मानव बना    जब    की     आखरी ।।
नहिं इसमें भी रंग, फले फुले ना संग,
दास तुकड्याकों उसकी ही लौ है लगी ।।3।।