नरका नारायण होता है, सुनके

(तर्ज : हरि भजन करे तो तू तर जायेगा रे...) 
नरका नारायण होता है, सुनके बात सन्तोकी।
सारा पाप भी जल जाता है,सुनके बात सन्तोंकी ।।टेक।।
उनके कहने पर ही चलना,प्राण जाय पीछे नहीं हलना
इतने पर ही तर जाता है, सुनके बात सन्तोंकी ।।1॥
चाहे वो पत्थरका जप दे चाहे वो घूमनेका तप दे।
ये तो जिसके दिल भाता है, सुनके बात सन्तोंकी।।2॥
कितनी है ऐसी परतीती, सन्तों की संगत की रीति।
उसका अर्थ नहीं करना है, सुनके बात सन्तोंकी।।3॥
तू अपने मनसे कुछ सोचे, तब दिमाग होना है अच्छे ।
इसमें भला सुध धरता है, सुनके बात सन्तोंकी।।4।।
परख-परखकर सन्त पछानो,तब उनके चरणोंमें जाना
नहीं तो फिर धोका होता है,सुनके बात सन्तोंकी।।5।।
जिनकी देह-दृष्टि नहीं बाकी,स्वारथ मोह नष्ट है जाकी ।
तुकड्या उनके हित गाता है,सुनके बात सन्तोंकी।।6।