पण्डित ! राम कहाँ से पावे ?
(तर्ज : सबसे राम -भजन अति प्यारा...)
पण्डित ! राम कहाँ से पावे ?
तू तो दिनभर चेला-चेली, भरी बजार भरावे ।।टेक।।
मीठो बोलत गलति न कहिये, जन सिरपर चढ जावे ।
मनरंगी, मौजी विषयनका, गुरुडंबर मन भावे ।।1।।
ग्यानकी बात कथामों रखिये, घरमें चोरी सिखावे ।
दुधमों पानी डारके बेचे, वही चेला भजवावे ।।2।।
दर्द नहीं गरिबनका दिलमें, छूआँछूत बढावे ।
जाती-वर्ण ग्यान न बोले, जो चाहे सो गावे ।।3।।
सच्चा ग्यान भक्ति दे सबको, देशभक्ति बढ जावे ।
तुकड्यादास राम घर - बैठे आकर दर्श दिखावे ।।4।।