प्रिय भाषण बोलो बालक से
(तर्ज : आया हूँ दरबार तुम्हारे... )
प्रिय भाषण बोलो बालक से, क्रोध करो नहीं, द्वेष करो नहीं,
परका मत देखो कभु उनसे ।।टेक ।।
यह हैं भारत की सतानें, कौन इन्हों का जीवन जाने?
बढकर भी निकलेंगे हमसे ।।1।।
निर्मल पानी जैसा बहता, वैसे ही बालक भी रहता,
बिगडे जात बुरी संगत से ।।2।।
व्यसनोंके आदी जो पाया, चहिये हर किसने समझाया,
देश सुखी होगा तन-धनसे ।।3।।
तुकड्यादास कहे, घर-घरमें; उत्तम रहनी बाणी मुखमें,
भारत हो तब ऊँचा सबसे ।।4।।