मेरे पंढरपुर के बादशहा !
(तर्ज : माझे सुन्दर जीवन पाहोनी. . . )
मेरे पंढरपुर के बादशहा ! भगतों की निभाता टेक -
भजों हरिनाम !
जो नियत अपनी साफ रखे, उनकी मिटाता रेख-
भजों हरिनाम ! ।।टेक ।।
पुंडलीक के घर आया, मातपिता की सेवासे ,
गोरोबा की मिट्टि तूने, सेवा में दिल है करके ॥
संत सावता की खेती में, करता है सब्जीकी परेख ।।1।।
दामाजी की हूंडी भरे, एकनाथ घर पानी भरे ।
जना की गोबरियाँ चूने,करूँ किस -किसका मैं उल्लेख ।।2।।
नामा दर्जी काम करे, उनके भजन में ताल धरे ।
तुकाराम की बाणी में तो, भरा दिया तोफोंका सेंक ।।3।।
तुकड्या कहे, मुझपर बीती, संकट काल में परचीति !
आश्रम में जब कमी पडा तब पेटीमें निकला है चेक ! ।।4।।