पढि-पढि शास्त्रोंकी बानी

        (तर्ज : मंगलमय नाम तुझे सतत...)
पढ़ि-पढि शास्त्रोंकी बानी, एकही    सुना ।
प्रभु के गुणगान करो, सुख न  उस  बिना ! ।।टेक।।
वेद-व्यास, नारद, शुक, वाल्मीकी ऋषि। 
बार-बार यों   ही    कही     नाम      साधना ।।1।।
संत तुका, ज्ञानदेव, जनाबाई और नामदेव ।
साँवता    और    रोहिदास, नाम   ही   धुना ।।2।।
स्वामी तुलसीदास, सुन्दर दादू भी खास |
भक्ति - बिना   और    नहीं    कहत    वन्दना ।।3।।
रामकृष्ण स्वामी ,रामभक्ति पर ही करत प्रेम ।
नरहरि    नरसिंह    करे,    सगुण     प्रार्थना ।।4।।
गुरुनानक और कबीर, सुमरन पर देत धीर |
कहे तुकड्या  भक्त    मीरा    और    बाहीना ।।5।।