भक्तनसे भक्ति मिले

        (तर्ज : मंगलमय नाम तुझे... )
भक्तनसे  भक्ति  मिले,  प्रेमीयों  से  प्रेम !
सज्जन से  सजनता, साधकों से  नेम ।।टेक ।।
जो जिसके पास रहे, वही उसके चाहक हैं ।
सुझबुझ समझ -सोच, करले  लेन - देन ।।1।।
गर चाहते शान्ती-सूख,चोरन को क्या परीख ?
असाधु के पास बसो, क्या  रहेगी  चैन ?।।2।।
कामीन के सँग लाग, सब बिकार होत जाग।
प्रकाश से है   नात  कहाँ, बोते   गर  रैन ।।3।।
जो जिसका ध्येय होत,उसी पथपर वाकी ज्योत ।
तुकड्या कहे, सुमरन-बिन,रमत नाही नैन।।4।।