मेरे सद्गुरु भोले - भाले है
(तर्ज : माझे सुंदर जीवन पाहोनी. ... )
मेरे सत्गुरु भोले-भाले हैं, मेरा भी किया उद्धार,
भजो गुरुदेव ।
मुझ-जैसे अतीत-पतितनका, नहीं लगता कहीं भी थार,
भजो गुरुदेव ।।टेक ।।
यों तो मैं इन्सान नहीं, मुझको ग्यान और ध्यान नहीं।
दिनभर टहलूँ बन-बन बहलूँ, गोंड -गवारीयोंके द्वार ।।1।।
जंगल -जनवर साथी मेरे, अस्वल, शेर से गाँठ परे।
सुन्दर मृग हैं,सांबर सींग हैं,इसमें मुझे आती थी बहार ।।2।।
नदियोंके तिर रेतूकी, पिण्ड बनाऊँ शंकर की।
ध्यान लगाऊँ,नाचूँ छन् छन्,भजन करूँ लेके एकतार।।3।।
तुकड्या, तुकड्या जम कहते, कोई मारे मुस्काते।
ऐसे भी दिन देखे हमने अब तो नाव लगी है पार।।4।।