दुष्टों को पूजनेसे वो

          (तर्ज : हर देशमें तू, हर भेषमें तू...) 
दुष्टों को पूजनेसे वो फले, ऐसा तो कभी नहीं होता है । यदि आगको ले सिरपर हीं भले, वह बिना जले नहीं रहता है ।।टेक।।
साँपो को पिलाओ दूध कहीं, क्या वह अमृत बन पायेगा ?
बीच्छूकी बडी पूछकार करो, फिरभी वह डंक लगाता है ।।1।।
चुगली वालोके पैर पडो, तो भी  निन्दा नहीं छोडेंगा।
कामी को बिठाओ मंदरमें, फिर भी नहीं विषय हटाता है ।।2।।
जिसकी हो शराबो पर ही निगा, उसको तो दूध कहाँ भावे ?
जो माँस बिना नहीं रह सकता, उसको मिष्टान्न न लगता है ।।3।।
इनपर तो निगा शासनकी हो जो साम-दाम-दंडनसे चले । 
तुकड्या कहे हृदय के परिवर्तन बिरलादको भागसे फलता है ।।4।।