बाबा ! परखो सत् गुरु कौन ?
( तर्ज : बाबा ! सबसे मीठा बोल... )
बाबा ! परखो सत्गुरु कौन ? ।।टेक।।
बिन खोजे नहीं ग्यान मिलेगा ,चाहे बन-बन लाख झुलेगा।
अनुभव के बिन राह कहाँकी ? सबने पकडा मौन ।।बाबा ! 0।।1।।
जिनकी मन, वाणी प्रभु गाये, जो जगके तनके दुख साहे।
आशा मनषा रही न जिसमें, सागरमें जिहूँ लोन । बाबा! 0।।2।।
आँखे होकर भिन्न न देखे, कान रहे पर शब्द न घोके।
इन्द्रिय है पर विषय न चाखे, सोsहं है, नहीं दोन ।।बाबा! 0।।3।।
तुकड्यादास कहे सतू बाणी, अन्दर-बाहर एकही जानी।
ऐसे गुरुपर प्राण निछा दे, कर हिरदे में बोन ।।बाबा ! 0।।4।।