बाबा ! मनसे बाते बोल

            (तर्ज : बाबा, सबसे मीठा बोल... )
बाबा ! मनसे बातें बोल, बाबा! मनसे बातें बोल ।।टेक ।।
मन जाकर विषयों में रमता, तू मन्दिरमें पूजा करता।
आँख लगाता, देव जगाता; सब होता है फोल ।। बाबा ! 0 ।।1।।
ग्यान-ध्यान की पोथी बाचे,घुंगरु बाँधकर मंदिर नाचे।
मनकी आँखे लगीं धनों पर, बख्त गया अनमोल ।। बाबा ! 0 ।।2।।
मन जागे तब जाग उगेगा, मनसे ही तो ध्यान जगेगा।
मनका ही संसार भरा है, मन सब करता गोल ।। बाबा ! 0 ।।3।।
इस कारण कहता हूँ-सुन ले,पहिले अपने काबू मन ले।
तुकड्यादास कहे रहे पीछे, सत्संगत में घोल ।। बाबा ! 0 ।।4।।