प्रभू तेरे दरपे लगाते है नारा । मिलेगा न कैसे चरण पे सहारा

(तर्ज: प्रभू मेरे दिलमें सदा याद आना...)

प्रभू तेरे दरपे लगाते है नारा ।
मिलेगा न कैसे चरण पे सहारा ।। टेक ।।
हमारा है विश्वास सच्चे करमपे, संतोकी बाणीमें गाये धरम पे ।
सदाचार-चारित्र्य बाना हमारा ।। १।। 
कभी ना करेंगे किसीसे दगाई । न घुसखोरी, चोरी न यारी बुराई ।
बहायेंगे सबमें सदा प्रेम धारा ।। २।। 
सचाईसे चलना यही तो धरम है। बनायेंगे मित्रोंसे ऐसा करम है ।
मुफ्त में न खाना यही है नजारा।। ३।।
घिसायेंगे श्रमसे सरीखे बदनको । जितना बने सारे तनको औ मनको। 
उडायेंगे सेवाका उसमें फवारा ।।४।। 
समागम भी साधू का दिलसे करेंगे । कभी ढोंगीयो में जरा ना ठरेंगे ।
यही दास तुकड्या का है ध्येय-नारा ॥ ५ ।।