पंडित जवाहर छोड गये

  ( पंडित जवाहर इनके निधनपर राष्ट्रसंतजीकी गीत श्रद्धांजली )           
                 (तर्ज : मेरे दिलमें गुरुने जादू... )
पंडित जवाहर छोड गये, यह सुनकर दिल घबडाके उठा ।
नहि होश रहा इस जनगणमें, अरे मानवताका चाँद मिटा  ।।टेक।।
यह हो सकता कैसे कहिए ?आपसमे जनता रोने लगी।
गाडीपर चढ़कर जाने लगी, दिल्लीपे कदम बढाने लगी ।।
           नेहरूजी अमर है । गाने लगी ।।१।।
सबकी आँखोसे जल निकले, शत्रुके दिल पछताने लगे ।
उस राजघाटके पासहिमे, दौडे पैदल गाडीसे भगे ।।
           लाखोंही पुष्प बहाने लगे ।।२।।
भारतके सहित सब विश्वभरे,राष्ट्रीके ध्वजभी झुकाये गये ।
गांभीर्य गया संसारका यह- सब देशी - विदेशी बोल गये ।।
          श्रध्दांजलि अर्पित करते रहे ।।३।।
बापूने दिया था याद हमें,हम दिलसे समझके चलते थे
उनकी बातोंपर गौर करे,विश्वाससे युवक उछलते थे। 
          पर आज हाथकों मलते थे ।।४।।
यह पंतप्रधानकी शव -शैया,उस इंद्रने जल भर सींच दिया ।
धरतीभी थरथर करने लगी, अब कौन मिले आधार गया ।।
            कहे तुकड्या युगही बदल गया ।।५।।