मानवताका सत्य पुजारी

        (तर्ज : उठा गड़्या अरुणोद्या झाला....)
मानवताका सत्य पुजारी, भारत का सच्चा साहित ।
स्वतंत्रताका सेनानी, था बापूका प्यारा जो जौहिर ।।टेक।।
पंडित नेहरू गया सही पर, गया देश-गाडीका ब्रेक ।
उच्च विचारोंका धरवर था,निर्मल मत जिसका था नेक ।।१।।
स्वतंत्रता तो मिली-मिलेगी, पर नत मिलेगे ऐसे ख्याल 
सभी धर्म और सभी देशको ,प्यारा पंडित जवाहरलाल ।।२।।
निर्मल था,अपनी बाजीपर,कुद पड़े जन-जनके मनमें।
लोहचुंबक था जनता का, बस दैवि शक्ति पायी उनमें ।।३।।
पूज्य गांधीकी बात न छोडी, घड़ी -घडी उमडता था ।
कोमल था, हृदय से अपने, बच्चोंमें पिघलता था ।।४।।
जाँत धर्म के तोड कीवाडें, अपने घरको किया फना ।
जलनथी दिलमें भारतभूकी ,इसी कारण मुखिया भी बना ।।५।।
ऐसे संकट के मौकेपर, जाना नहीं था नेहरुजी ।
गयी -गयी हिंमत जनता की, नेताकी और बीरोंकी ।।६।।
उठ गया गांभीर्य हमारा, चैन नहीं अब नींद गयी ।
भारत-माता सम्हाल अब तू, तुकड्या की है पुकार यही ।।७।।