प्रीय महात्मा गांधी ! तूने सारा सुख आजमाया

         (तर्ज: डमडम डमडम डमरु बाजे...)
प्रीय महात्मा गांधी ! तूने सारा सुख अजमाया ।
             जब के आजादी पाया।।टेक।।
तेरे सुख में बसा था भारत,था सब जनका बोझा ।
रामनाम के जपनेसे वह,मार्ग तुने  था   खोजा ।।
मरवानेसे  मरना  अच्छा, छाती   ढाल   बनाया ।।१।।
सत्याग्रह थी गोली तेरी, मार करे तोपों  का ।
सत्य -अहिंसा-विनयभावसे,था शत्रूको धोखा ।।
तप था तुझमें श्रध्दा-संयम,तोल न छोडे  काया ।।२।।
मानवता के   लिए   लड़ेंगे, रामराज्य   पानेकों ।
जनगण जागृत किया,लगाया घर-घर में गानेको ।।
तुकड्याने भी भजनभावसे पत्थर बाँम बनाया ।।३।।