मत कर पर निन्दा का ख्याल,तू तो अपनी नीति संभाल

          (तर्ज : प्यारे अपनी गठड़ी खोल...)
मत कर पर निन्दा का ख्याल, तू तो अपनी नीति संभाल ।।टेक।।
दोनों एकमेकसे बोले, उसमें कौन किसीको तौले ?
सत्‌ का हरदम रखना ख्याल।।तू तो अपनी नीति0।।1।।
तू भी मानव वही मानव है, तू हो देवी वह दानव है।
जब वो माने  तेरी   मिसाल ।। तू तो अपनी नीति0।।2।।
शराब लेकर दोनों पीते, पीकर आपस ग्यान सुनाते।
होते नाली   में ही   निहाल ।। तू तो अपनी नीति0 ।।3।।
हमतो सत्संगत के साथी, क्यों हो व्यसनाधीनसे प्रीति ?।
हमारा नहिं उसमें हो ताल । तू तो अपनी नीति 0।।4।।
तू तो निरअभिमान रहेगा, अपने प्रभुका भजन करेगा।
तुकड्या कहे, हटेगा काल ॥ तू तो  अपनी नीति0।।5।।