प्यारा है नाम हरीका, जप सार्थक कर जीवन का

           (तर्ज : गुरुदेव हमारा प्यारा...)
प्यारा है नाम हरीका,जप सार्थक कर जीवन का।।टेक।।
क्यों परनिंदा करता है,प्रभु-नाम न मुख भरता है?
खोता  है   समय  पल - छीनका।। जप  सार्थक0।।1।।
मन बोले वही बकता है, नहीं सत् संगत झुकता है ।
कब बोझ   हरे   इस   तनका ?।। जप  सार्थक0।।2।।
नेकीसे कमाना धन है, दे दान जहाँ सत्‌गुण हैं ।
क्यों घुंस    लेता   गरीबनका ?।। जप  सार्थक0।।3।।
मुखमें रख मीठी बाणी, तब सुधर जाय जिन्दगानी।
तुकड्या कहे, सुन, सत्‌-जनका।। जप सार्थक 0।।4।।