प्रभुनाम सुमर मनमाँही, सब टले विघ्नदिशदाही
(तर्ज : गुरुदेव हमारा प्यारा... )
प्रभुनाम सुमर मनमाँही, सब टले विघ्न दिशदाही ।।टेक।।
मंगल-हरी सुमरन शुभनाम, सिद्ध होत संकल्प सकाम ।
यह संत-शास्रकी ग्वाही।। सब टले0।।1।।
जो सत् कार्य धरो निश्चयसे, नाम भजो धोका नहीं भयसे ।
भगतन के साथ प्रभु ही।। सब टले0 ।।2।।
शुभ-अशुभन को क्यों चिंतित है? जब यह कार्य जगत् के हित है ।
प्रभुको है फिकर सभी ही।। सब टले0 ।।3।।
तुकड्यादास कहे सुख पाओ,कार्य करो, मंगल -गुण गावो ।
तब पावे सिद्धि सदा ही।। सब टले0 ।।4।।