बापू ! तू सबका प्यारा था

              (तर्ज: मैं एक छोटासा नहा...)
               बापू ! तू सबका प्यारा था,
तेरा प्रेम समान । भाई और बहनोंपर ।।टेक।।
कस्तुरबा सी धर्म पत्नि को,तुझे भाग्यने सौंपा ।
धन्य शान्ति-सेवा की मूर्ति,करुणा की अनुकंपा ।।
               सारी बहनोंपर प्रेम वही,
भेद नही किसी ओर। भाई और  बहनोंपर ।।१।।
बिदेश की मीरा को तूने,निर्भय सेवां बाँटी ।
संरक्षण देकरके उसको,चढा दिया हिम-घाटी ।।
              हजार-लाखो भी महिला को,
तेरा    था   आधार । भाई   और  बहनोंपर ।।२।।
कइ लडकिन को सेवा करने,देशमें तूने छोडा ।
पति - पन्नी को ब्राम्हचर्य का,व्रत देकर घर जोडा ।
             निर्मल प्रेम तेरा बच्चोंपर,
बेडर कर दी  जान । भाई   और   बहनोंपर ।।३।।
तुकड्यादास कहे महिला की,उन्नति तू चाहता था ।
उसके कारण भले -बुरे संकट भी सह लेता था ।। 
            मिलना मुश्किल हे तुझ-जैसा,
इस भारत का प्राण । भाई    और  बहनोंपर ।।४।।