प्रे मुझपर बापू का था, इसमें मुझको शक नही
(तर्ज: हर जगह की रोशनी .. )
प्रेम मुझपर बापु का था, इसमें मुझको शक नही ।
मैं भी उनके साथ था,पर मुझपे किसिका हक नहीं ।।टेक।।
जो भी हों प्रभु-भक्ति-इच्छुक,
वे मेरे सब मित्र है ।
उनकी सेवावृत्ति का, मेरे हृदय पर चित्र है ।।१।।
हों किसीके शिष्यगण,
या हों किसीके श्रीगुरु ।
सबसे मेरा स्नेह है,में कार्य सच सबका करूँ ।।२।।
प्रेम करते देशपे जो,
साथ करते धर्मका ।
वर्म जँचता है मुझे, उनके सभी शुभ कर्मका ।।३।।
बापु का आदर्श था
एक सन्त-सज्जन-भक्त का ।
कहत तुकड्या, थी करूणता, रोग ना आसक्ति का ।।४।।