देश हमारा सबको पूजे, जो कराता है भक्ती
(तर्ज: दीनदयाघन करुणासागर...)
देश हमारा सबको पूजे, जो करता है भक्ति ।
उसकोहि मिलेगी मुक्ति ।।टेक।।
पूज्य गांधीने यह समाझा था,करके नाम लिया है ।
राम-भक्ति और शाम प्रार्थना से ही पायी शक्ति ।
उसकोहि मिलेगी मुक्ति0।।१।।
घर-घर में गरिबों के जाकर सेवा-मन्त्र सिखाया ।
दुसरों के दुख अपने समझे,तन से पायी बिरक्ति ।
उसकोहि मिलेगी मुक्ति0।।२।।
किसी जीवकी हिंसा करना,भारी पाप बताया ।
पर-उपकार पुण्य होता है,यही सन्त की उक्ति ।
उसकोहि मिलेगी मुक्ति0।।३।।
आजभी उनके शब्द कान में,गूँज रहे हैं मे ।
तुकड्यादास कहे मैं बोला,बिना किसीकी सख्ती ।
उसकोहि मिलेगी मुक्ति0।।४।।