फिर ऐसे नर - तन की क्यो है बडाई
(तर्ज : इस तन धन की कौन बडाई... )
फिर ऐसे नर-तन की क्यों है बडाई ? ।
जिससे न संकटमें सेवा हो आयी ।।टेक।।
इसीके लिये ग्यान है मानवों में ।
सभी मिलके रहना है, सत्-कारणोंमें ।।1।।
इसीके लिये धन जमा है कहाये।
जरुरत हो किसको, मदद दो बहाये ।।2।।
इसीके लिये ज्ञान, तुकड्या पुकारे ।
सुधारेंगे सबको पड़े जो बिचारे ।।3।।