नाचना तो जाने नाही, टेढी कहे अंगनुवाँ
(तर्ज : पिया के अंगनवाँ जागी सारी रात मैं. . . )
नाचना तो जाने नाही, टेढी कहे अंगनुवाँ ।
भक्ति- भाव बिनु, कैसे मिले मेरे राम?।। टिक।।
पाप बढाकरके सारी जिन्दगी बहादी।
बीमारीने घेरा,जब कि नाम-माल हाथ ली ।।
कैसी मिले शान्ति मनमें ? दुःख ही तमाम हो ।।1।।
कहे भरे मुख़वा मोडे; धर्म-कर्म झूठ है।
संत-संग कौन करे, समयकी ही लूट है ।।
आज कैसे पगुवा झोके, वारे तेरो काम हो ! ।।2।।
बातें सुनतो -मार्ग मिले, सोच-पछताप से।
कहे दास तुकड्या,बोले जिया भक्ति-भावसे।।
प्रभू- बिनु कोई नाही, देवने अराम हो ।।3।।