भारतसे लडनेवाले हो ? ईश्वर से जरा तो डरो !
(तर्ज : तेरी प्यारी -प्यारी सूरत पर ...)
भारतसे लडनेवाले हो ? ईश्वर से जरा तो डरो ! !
अरे ! सुनलो ! !
तुम अपनी नीती - अक्कलको,अब तो भी जरा सुधरो।
अरे ! सुनलो ! ! ।।टेक ।।
क्यों संसार दुखाते हो ? शाँति भंग करवाते हो ?
सब देवोको क्रोध चढाकर,अपना नाश कराते हों !।।1।।
अपना -अपना ले खाते, खुशी-खुशी में जी जाते।
क्योंकर किसपर हमला लाकर,विश्व अशान्ति कराते हो ! ।।2।।
मत समझो भारत दुर्बल, उसमें हैं अर्जुन-से मल्ल।
शिव, राणा,हनुमान हैं उसमे,अष्ट भुजा दुर्गाका बल ! ।।3।।
झाँसीवाली मरी नहीं, भगतसिंग कहि दूर नहीं।
गुरुगोविन्द-सुभाष हैं बैठे,उनकी क्रांति डरी नहीं !।4।।
बडे-बडे हैं वीर यहाँ, राम-कृष्ण- नल- नील यहाँ !
शांती गांधि-से छिपे हूँए है, बांध रखे जंजीर यहाँ !।।5।।
जानो बुध्द यहाँ ही हैं, उनका सिरपर छत्र रहे।
कहता तुकड्या, इसी कारण से,भारत यह आबाद रहे ! ।।6।।