भक्ती का प्यारा भगवान ! भक्ती से ही तारता
(राग: झिंजोटी ; ताल : तिनताल....)
भक्ती का प्यारा भगवान !
भक्ति से ही तारता है जान ! ।।टेक।।
बिन प्रीती भक्ति है सुनी !
भक्ति बिना परचीत न होनी!
तरने को भव है महान्! ।।1।।
जप-तप योग-यज्ञ सब कीन्हे।
शास्त्र पुराण पढ़े, पढ लीन्हे।।
होती ना प्रभू पहिचान ! ।।2।।
भक्ती की महिमा अति प्यारी!
भक्तोंने गायी बलिहारी ! !
कहते हैं, सब ही सुजान ! ।।3।।
जो चित-मनसे प्रभू गुण गावे।
जनम -जनम धोखा नहिं पावे।।
तुकड्याने पाया बरदान ! ।।4।।