नौ तार वाली मेरी प्यारी ये सितार है !

             (तर्ज : सौ साल पहिले..... ) 
नौ तार वाली   मेरी   प्यारी   ये    सितार   है ! ।
बजे जब, तो आती, उसकी बडी ही बहार है।।
एक-एक तार उसका, विश्व का अधार है।
बजे जब, तो आती उसकी बडी ही बहार है  ।।टेक।।
एक तार कानों से ही सुने सारी बातें। 
एक तार नैनो से ही लगाता है नाते।।
एक तार है जबॉंमें, बोले करता प्यार है।
बजे जब, तो आती उसकी बडी ही बहार है ! ।।1।।
एक तार नाकों से ही बदन को जिलाता।
एक तार हाथों से ही   जिन्दगी बनाता।।
एक तार बुध्दि में है, करता सुधार है।
बजे जब, तो आती उसकी बडी ही बहार है ! ।।2।।
एक तार पेट में हैं, अन्न को पचाता ।
एक तार पैर में है, विश्व में घुमाता ।।
एक तार सारे मन में, लगा देता घोर है ।
बजे जब, तो आती उसकी बडी ही बहार है ! ।।3।।
सारे तारका है   मेरा प्यारा   बजवैय्या ।
उसीने चलायी मेरी, बजा- बजा नैय्या ।।
कहे दास तुकड्या, मेंरा वही करतार है !
बजे जब, तो आती उसकी बडी ही बहार है ! ।।4।।