पाप किया तब छुपना क्या। पाप किया, पापी नहिं हैं में-

(तर्ज: प्यार किया तो डरना क्या... ?)

पाप किया तब छुपना क्या।
पाप किया, पापी नहिं हैं में-
यों   चोरी   से    रहना   क्या ? ॥टेक ।।
किसिकी जिन्दगी कोई उठाना ।
यहीं जानवर का हे बाना ॥
कुत्तेकी ही मौत जगत में-
क्या कहो,वैसे मरना क्या ? पाप 0 ।।१ ॥
रावण ने सीता उठा लायी।
रामचन्द्र ने किया लडाई ।।
वैसे सबपर बीते जब तो-
फेर तमाशा करना क्या ? ।। पाप 0 ।।२ ॥
"जिसकी है लाठी, भैंस उसीकी ।
-यही थी दुनिया थोडी  पिछुकी ।। 
तुकड्यादास कहे, अब  तोभी -
वैसे अनाडी रहना क्या ?।।पाप 0 ।।३ ।