प्रेमीपर तो प्रेम करना, सब जमाना जानता

        (तर्ज: हर जगह की रोशनी में. . )
प्रेमीपर तो प्रेम करना, सब जमाना जानता ।
शत्रुपर भी प्रेम करना, बापुकी थी मान्यता  ।।टिक।।
सब हैं   मानव   एक   ही,
लाचार व्यसनी हों कोई ।
स्वार्थवश बिगडे भी हों ,उनको सुधरना काम था ।।१।।
जिसने उनपर बम गिराया,
उसको  भी   करदी  क्षमा ।
उस महात्माको इसीसे   शान्तिदूत   कलाम   था ।।२।।
प्राणियों से प्रेम करता,
सन्तही   कहते   उसे ।
गांधीने जीवन में अपने,सध लिया यह नाम था  ।।३।।
आजमा ली मेंने उनके,
प्रेम की   प्यारी   छटा ।
दास तुकड्या बोलता है, सच वही दिल राम था ।।४।।