माला पहने क्यों बैठे ?
(तर्ज: भजलें सद्गुरु नाम निरंतर... )
माला पहने क्यों बैठे ?
जप-तप तो होता एक नही ।
गांधी - जैसा गमा दिया,
फिरभी तो तुम्हें उव्देग नही ।।टेक।।
सही सनातन गांधी था,
मरते भी उसने राम कहा ।
भारत को सन्देश दिया,
करनेको विधायक काम कहा ।।१।।
स्त्री -शिक्षा पर जोर दिया,
हर माता भारत माँ हि बने ।
हरिजन की बच्ची भी सीखे,
राष्ट्रपती की शान बने ।।२।।
यह जिम्मेदारी लें नेता,
सन्त-देवता काम करें ।
भारत गर नहि सुधरा, तब तो -
सिरपर राज हराम करे ।।३।।
सन्तो ! गांधी नहि होता तब,
नास्तिक के हि शिकार थे तुम ।
तुकड्यादास कहे अब ऊठो,
जो प्रभु के ही हार थे तुम ।।४।।