भोला किसान है मेरा
(तर्ज : गेला हरी कुण्या गांवा...)
भोला किसान है मेरा, जिसका प्रभुपर निर्धारा ।
न जाये शराब से घेरा ।
वो है प्यारा, प्यारा सदा हमारा ! ।।टेक।।
पहिले टूटा है तनका, दुखीया रहता है मनका ।
बदनपर कपडा नहीं सणका, फिकर करता है जीवनका ।।
सदा खेतों में है रहता, उसका फिरता है डेरा !।
वो है प्यारा, प्यारा सदा हमारा 0 ।।1।।
सीधा स्वभाव है उसका,मुफत में खाता नहिं किसका ।
हमेशा साथ करे सचका, सच्चा खुन उसके नसका। ।
करता श्रम हरदम जसका, उसीपर जीवन है सारा।
वो है प्यारा, प्यारा सदा हमारा0 ।।2।।
उसने चेन नहीं देखा, बलके नहीं पढा-लिखा।
नाजको उपजाता बाका, बनाता सुन्ना खेती का।।
बैल और गावोंसे नाता, उसीपर प्रेम करे सारा।
वो है प्यारा, प्यारा सदा हमारा 0 ।।3।।
आजकी दुनिया मनरंगी, न उसको करे कोई संगी।
फँसादे कहीं नशा गुंगी, करादे जिंदगी ही नंगी।।
दास तुकड्या का परिवारा, ऐसा भारत हैं मेरा।
वो है प्यारा, प्यारा सदा हमारा 0 ।।4।।