भगवान मेरे ! नहीं दूर

(तर्ज : ओठों पे हँसी, पलको में. ... )
भगवान्‌ मेरे ! नहीं दूर धरे।
हरदमही नजरमें रहते है।।
पानी में है वो, खाने में है वो।
गाने में  भी  गाना  गाते  है ! ।।टेक।।
हर चीज उसकी  है  सूरत ।
मन्दर में भि उसकी है मूरत।।
फूलोंमे भी है, सूलोंगे भी है ।
हरदमही नजर में रहते  है ! ।।1।।
यह कोन कहे, उसमें न प्रभू ।
सब छान लिया, दिल ठान लिया ।।
हर स्वाँस में है, पलकों में रहे ।
हरदम ही नजर में रहते है ! ।।2।।
भगवान्‌ भजे, भगवान्‌ मिले ।
शैतान  भजे,   शैतान मिले ।।
दोनों की समझका भेद यहाँ ।
हरदमही नजर में  रहते  है  ! ।।3।।
हमसे न जुदा कर सकते कोई ।
जैसी न सुगंध औ फूल अलग ।।
तुकड्या ये कहे, दिल मस्त रहे ।
हरदमही नजर में   रहते  है ! ।।4।।