दुनिया करती है पुकारा । कैसा होगा बेडा पार ?
(तर्ज : कभी याद करके, गली...)
दुनिया करती है पुकार ।
कैसा होगा बेडा पार ?
ले आना हमारे मोहना ! ।।टेक।।
तेरेही चरखे से आजादी पायी ।
दिल्ली के कीले में भयी रोशनायी ।।
खोया तेरा अवतार, टूटा शान्तिका तार,
चले आना0।।१।।
तेरी पुकारों से जागा फिरंगी ।
भारत में चमका तबसे तिरंगी ।।
अब तो नैया है मँझधार,दिल को करती है बेजार,
चले आना0।।२।।
तेरी अहिंसा से सम्हला है भारत ।
तेरी सलाहों से ठहरी इमारत ।।
हमने खोया तेरा प्यार, बापू ! मिल जा एकबार,
चले आना 0।।३।।
तेरा ही भारत में था एक द्वारा ।
अब बालको को है किसका सहारा ?।।
सुनो तुकड्याकी पुकार, दे दो फेरसे अधार,
चले आना 0।।४।।