मेहमान है तू, अरे दो दिन का ।
(तर्ज : होठों में हँसी, पलकों मे... )
मेहमान है तू,अरे दो दिन का,यहाँ कौन हमेशा रहता है ?
बतला तो सही, तेरे और कहाँ ? तू नाम जिन्होंका कहता है ! ।।टेक।।
तू तेरा है कि औरोंका, माँ-बापका है की गैरोका।
सब सुनके चला,सच क्या निकला ?।। यहाँ कौन 0।।1।।
जैसा ही करे वैसा ही भरे, यहाँ नेकका बदला नेक मिले।
शक्कर जो दिये, शक्कर ही मिले।। यहाँ कौन0।।2।।
दिखने को अटारी है भारी, जरतारी पहने है नारी ।
सब ठाट पड़े, जब प्राण उड़े ।। यहाँ कौन0 ।।3।।
तेरी आँखोंमे नूर दिया किसने ? मैं चाँद-सुरज तक रहता हूँ
कहता तुकड्या, भज राम सदा ।। यहाँ कौन0 ।।4।।