बाते ना बताओ मेहमान !
(तर्ज : जावो, ना सतावो रसियाँ ...)
दोहा-1 : किसकी छाती हैं बडी, कभू न बोले झूठ ।
चाहे मुसिबत आ पडे प्राण जाये यदि छूट ।।
दोहो-2 : हम हैं परींदे स्वर्गके खाते गर्व-गुमान।
सच बोले, सचही चले, उन्हें निछावर जान।।
भजन : बातें ना बताओ मेहमान !
उसमें हो साची शक्ति महान् ! ।।टेक।।
भले कोई काव्य करता हो, भले कोई लेख लिखता हो।
असर करती न जनपे तान, बातें ना बताओ मेहमान ! ।।1।।
भले कोई भेख बनवाये, भले कोई अर्थ बतलाये ।
व्यर्थ ही रहता है सारा बयान, बातें ना बताओ मेहमान ! ।।2।।
भले सत्ता रहे करमें, भले भत्ता मिले घर में।
असर ये चीज है निर्बाण, बातें ना बताओ मेहमान ! ।।3 ।।
इसी कारण से कहता हूँ, अलग दुनियाँ से रहता हूँ ।
तुकड्या कहे, नहीं अरमान, बातें ना बताओ मेहमान ! ।।4।।