महँगी करो नहीं साथ है ।

(तर्ज: मेहंदी लगी मोरे हाथ रे...)

महँगी करो नहीं साथ है ।
हम भक्तों के भक्त हमारे ।।
यही   तुम्हारी   बात   है ! ।।टेक।।
भिल्लीनीने जब तुमको पाया।
जूठे बेर तुम्हे खिलवाया ।।
किया न कुछ जप-जाप है ! ।।1।।
कुबजा के संग रंग गये तुम ।
रंग गये नही, संग गये तुम ।।
ये    कैसी    खैरात   है !    ।।2।।
बिदुरी के घर छिलके खाये ।
केले को नहीं कीमत लाये ।।
गोपी भी नाच नचात है !   ।।3।।
योग-याग औ जप-तप करना ।
अहंकार में जाकर मरना ।।
ये नहीं   हमरी   जात  हे !  ।।4।।
हम हैं पागल उस सूरत के ।
कुंजन बन की उस मूरत के ।।
तुकड्या को यही भाँत है ! ।।5।।