भजन

क्रमांक भजन
1 जिवाभावानं जव मी पाहिलं
2 जिस गुरु ने मोहे ज्ञान दिया
3 जिसकी उसकी निन्दा करने
4 जिसके घरमें दिया जला फिर
5 जीवदया ठेवा तरी आहे बरे ।
6 जीवन का मजा पाना है तुझे, फिर संयम करवा ले
7 जीवन को खतम कर प्रभुमें, तब सुख घर बैठे आये ।।टेक ॥
8 जे तुज जाणती भावाने I
9 जैसे खावे ल्यावे प्यावे । तैसे देवा आळवावे
10 जो करना वह सोच-समझकर
11 जो क्षत्रिय कहनेको चाहे
12 जो जो होय मोठा तो तो चिंता वाढे ।
13 जो धन जगमें जीवन देता, उसको नहीं ऊपजाते ! कागज की दलाली करते ! ।
14 जो नम्र सदा, प्रिय भावुक है
15 जो नम्र होऊ नेणे ! तेणे बुडविले जिने
16 जो परनिन्दा, परद्रव्य हरे
17 जो रुजगार चलाओगे, जग जाहिर कर जावोगे ।
18 जोग में अडकता, बडबडता, क्यों अनुभव के घर नहीं चढता
19 जोग में अडकता, बडबडता, क्यों अनुभव के घर नहीं चढता
20 जोग में अडकता, बडबडता, क्यों अनुभव के घर नहीं चढता
21 जोगन बनके जाऊँगी मैं
22 जोगी दर्शन दे, दर्शन दे, दर्शन दे ।।टेक।। दुखिया हूँ तेरे द्वारपे आया।
23 जौहरी होवन को चटके, आखरी फूगे से लटके
24 ज्ञान-दीप हा विद्यार्थ्याचा, वऱ्हाडचा हरपला ।
25 ज्ञानामृत अंजन त्या नेत्री, नाशे पडळचि मोहाचे