तुकड्यादास
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भजन
1
सच्चा धरम नहीं जाना तूने रे भाई । सच्चा धरम नहीं जाना !!
2
सच्चा सेवक वही कहलाता
3
सच्चे सेवक बनेंगे हम, जब आज़ादी को पायेंगे।
4
सजनोss ! अब स्मरण तुम्हारा आता
5
सतसंग जरी क्षण एक मिळे
6
सतसंगा वीण न कळे निजज्ञान
7
सता रही है वह याद मुझको,जो पूज्य गांधीसे हो गई है
8
सत् छोडे पथ जाय
9
सत् संगत हर घडी, करेसे मनकी आदत मुडी
10
सत्य - ज्ञानानं जिव उध्दरतो रे, भक्ति भावानं देव वश होतो
11
सत्य का प्रयोग बापू
12
सत्य हे उमगले, जाहली स्फुरणा
13
सत्संगति के निर्मल जलसे, न्हाये हम दिल खोल पियारे
14
सत्संगाविण ज्ञान मिळेना, सद्गुरु-बोधाचे ।
15
सत्गुरु नाम तुम्हारा, दिलसे पियारा। जो जपता है जनम सुधारा
16
सत्गुरु भगति दीजिये, सत्गुरु भगति दीजिये।
17
सदगुरु - चरणी दृढ भावाने जाशि
18
सदगुरु चे नाम सख्या ! वदत जा मुखी
19
सदगुरुचे द्वय पाय सोडुनी
20
सदभावे निजभजन करी । प्रकटे हृदयी गिरिधारी
21
सदा उफाळते मन I कधी पाहीन चरण
22
सदा गर्जती पुराणे । तया भक्तांच्या कारणे
23
सदा तुझ्या चिंतनी रहावे, वाटे गुरुराया!
24
सदा नारायण पुजावा सुमरने
25
सदा संतसेवेत वृत्ती जडू दे
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