भजन

क्रमांक भजन
1 प्रेम भजन रघुबरको
2 प्रेमरस चखवा लेता है, वही भवसिंधू तरता है
3 प्रेमियों को प्रेम देना ही हमारा फर्ज है
4 प्रेमीपर तो प्रेम करना, सब जमाना जानता
5 फकीरी महाशूरनरकी शूर
6 फावलीया मज पाहशील डोळा
7 फिर ऐसे नर - तन की क्यो है बडाई
8 फिरता का विषयी दिनरात ?
9 फुटल्या कपाळे तू काय करिसी
10 बंदे ! क्या बातें करता ? अंतमें खावेगा गोता
11 बंदे ! हुशार होना बे, नहीं तो जा फिर रोना बे
12 बंदे है मस्तके हम
13 बंधुनो ! प्रार्थने चला, जागू या
14 बखत आगयी कुछ तो करले सही है
15 बघ डोळा उघडून, तापि गे !
16 बघता शोध मिळेना, भिन्न मते त्यांची ।
17 बघसि न का मज पापि म्हणुनिया? तार अशा अधमाला।
18 बघु नको अशी डोळ्यांनी, अग गायी !
19 बघू दे , बघू दे मज आत्म्याने बघू दे ।
20 बचाओ प्राण गौओंके । अगर हिन्दू कहाते हो।
21 बजारे तेरी बाँसरी !
22 बडा भरोसा बना रखा है
23 बडी कठिन थी स्वराज मंजिल
24 बडी फजीती है भारत की
25 बडी बडी बातों में क्या है रख्खा